इतिहास मे सबसे बेवकूफ व्यक्ति कौन है?

इतिहास मे सबसे बेवकूफ व्यक्ति कौन है?
अगर आप गंजे को कंघी बेच सकते हो तो आप एक बढ़िया विक्रेता हो। आप अंधों के शहर में आइना बेचते हो तो आप बेवक़ूफ़ कहे जाओगे।

क्या हो अगर कोई व्यक्ति कुछ इसी हैरत अन्दाज़ में बुलंदियों को छूता चला जाता है, पर बावजूद सबसे अमीर और प्रसिद्ध हो कर भी अपनी मूर्खता से जन उपहास का कारण बनता है?

यहाँ तक की यह व्यक्ति अपने बीवी बच्चों और सेवकों से भी इज़्ज़त नहीं पाता है।

आइए परिचय करते हैं ऐसे ही एक व्यक्ति से, जिसका नाम है..

टिमथी डैक्स्टर (Timothy Dexter)

अदब से कहें तो

लॉर्ड टिमथी डैक्स्टर! (जैसे की वो ख़ुद को कहलवाया जाना पसन्द करता था)

उसी के शब्दों में..

I am the first in the East, the first in the West, and the greatest philosopher in the Western world.

(मैं पश्चिम में प्रथम हूँ, पूर्व में प्रथम हूँ और पश्चिमी दुनिया का महानतम दार्शनिक हूँ)

टिमथी डैक्स्टर! एक अत्यंत सफल धनाढ़्य!

एक लेखक! चौथी कक्षा ड्रॉपाउट

एक दार्शनिक! (?)

लॉर्ड! (स्व घोषित)

और एक सनकी!

टिमथी डैक्स्टर जिसने जीते जी अपने अन्तिम संस्कार का आयोजन किया था और बीवी को नहीं रोने पर पीटा था।

जिसने स्व प्रशंसा और पर निंदा में एक ऐसी अजीबोग़रीब किताब लिखी जिसको समझने के लिए आपको अपनी विद्या को ताक पे रखना पड़ेगा।

टिमथी डैक्स्टर [Timothy Dexter (January 22, 1747 – October 23, 1806)]

टिमथी, मासाचूसैट्स (Massachusetts, USA) की माॅलडैन सिटी के खेतीहर मज़दूर परिवार में पैदा हुआ था। ग़रीबी का यह आलम था कि उसे 8 वर्ष की उम्र में स्कूल की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। उसके अगले 6 वर्षों तक उसने खेती में घर वालों का हाथ बँटाया।

फिर टिमथी नया काम सीखने के लिए बॉस्टन (Boston) शहर में आ गया। यहाँ उसने प्रशिक्षु के तौर पर एक चमड़े के व्यापारी के यहाँ नौकरी करी और चमड़े के वस्त्र बनाना सीखा जो उस समय चलन में थे।

टिमथी डैक्स्टर को शुरू से ही अपनी अलग पहचान बनाने की बेक़रारी थी, जिसके लिए वो बहुत बार वो सनकीपने की हद तक चला जाता था।

क़रीब सात साल तक चमड़े का यह काम सीखने के बाद उसने ख़ुद का व्यवसाय स्थापित करना चाहा, पर उसके पास धन नहीं था और इसी चाह के चलते 1769 में उसने चार बच्चों की माँ एक बेहद अमीर विधवा औरत से शादी कर ली। बीवी के पूर्व पति का चमड़े का ही स्थापित व्यापार था जिसे टिमथी ने सम्भाल लिया।

विधवा औरत जिसका नाम एलिज़ाबेथ था, उसका शहर की पॉश कॉलोनी में एक बड़ा घर था, आस पास रहने वाले भी शहर के माने हुए अमीर लोग थे।

यहीं से शुरू हुआ सफ़र टिमथी डैक्स्टर का, आस पास के सभी शहरों में सबसे सफल और अमीर व्यवसायी बनने का।

शुरुआत क़िस्मत और टाइमिंग के रोचक मेल की।

टिमथी को व्यवसाय की समझ नहीं हुआ करती थी, वो अपने आस पास रहने वाले, ख़ुद से अमीर पड़ोसियों से ज़बरदस्ती मेल जोल बढ़ाता था, उसकी चाह रहती थी कि लोग उसे सभ्रांत और कुलीन वर्ग का समझें।

जल्द ही उन लोगों को उसकी असलियत पता पड़ गयी और लोग उससे कन्नी काटने लग गए।

वो अपने व्यवसाय के निर्णयों के लिए भी इन पड़ोसियों से जबरन सलाह लेने आ जाया करता था। पड़ोसी भी पीठ पीछे उसका मज़ाक़ उड़ाते थे।

टिमथी चमड़े के व्यापार के से बचे पैसों को कहीं और निवेश करना चाह रहा था, उसने अपने पड़ोसियों से मशवरा किया, पड़ोसियों को लगा यही मौक़ा है इस अनपढ़ अवसरवादी को दिवालिया करने का।

उस समय सरकार ने कॉंटिनेंटल डॉलर बिल जारी किए हुए थे, पर ये करेन्सी में निवेश का एक फ़्लॉप आयडीअा साबित हुए थे, इनकी क़ीमत जनता में दिन भर दिन गिरती जा रही थी। पड़ोसी ने टिमथी को कुछ इस तरह सब्ज़ बाग़ दिखाए की टिमथी ने ना केवल अपनी जमा पूँजी बल्कि बीवी की बचत से भी जितने बन सके उतने ये डॉलर बिल ख़रीद लिए।

उस समय अमेरीकी क्रांति अपने आख़िरी दौर में थी। ज्ञात रहे कि अमेरिका 4 जुलाई 1776 को आज़ाद हुआ था।

क्रांति के ख़त्म होते होते उक्त करेन्सी की क़ीमत में अचानक उछाल आया और टिमथी को दी गयी एक बुरी निवेश सलाह उसको रातों रात करोड़पति बना गयी।

अब टिमथी ने समुद्री जहाज़ ख़रीद लिए और अपने निर्यात व्यवसाय की शुरुआत कर दी।

बताने की ज़रूरत नहीं कि पड़ोसी अपना ये दाँव उलटा पड़ता देख जल भून कर ख़ाक हो गए थे। टिमथी अब फिर से पड़ोसियों के पास आया कि क्या निर्यात किया जाना चाहिए।

एक पड़ोसी ने कहा की तुम कैरेबीयन आयलंड में बैड वॉर्मिंग पैन (Bed Warming Pan) बेचो, वहाँ उसकी बहुत डिमांड है।

बैड वॉर्मिंग पैन एक लम्बे हत्थे वाला बड़ी कलछी से भी बड़े बर्तन की तरह होता है, जिसका सर्द प्रदेशों के लोग बिस्तर को गर्म करने के लिए लेते हैं। उस में गर्म कोयला या पत्थर भर कर, सोने से पहले बिस्तर पर फिराया जाता है ताकि चादर गर्म हो जाए।

बता दें कि कैरेबीयन आयलंड गर्म प्रदेश है, वहाँ के लोगों को इस उत्पाद की ज़रूरत ही नहीं थी। वहाँ ये उत्पाद बेचना एक बड़ी मूर्खता थी। ये ठीक ऐसा ही था जैसे रेगिस्तान के लोगों को छाते बेचना।

पड़ोसी की बातों में आकर टिमथी ने बेड वॉर्मिंग पैन से भरे जहाज़ कैरेबीयन आयलंड रवाना कर दिए। वहाँ जाकर एक चमत्कार हुआ, लोगों ने तो ख़रीदने में कोई उत्साह नहीं दिखाया पर वहाँ के शूगर प्लांट के मालिकों को इस तरह के बर्तन की अपने प्लांट में ज़रूरत थी। देखते देखते टिमथी का सारा माल उच्च क़ीमतों पर बिक गया।

और यह निर्यात सौदा कई सालों तक नियमित जारी रहा और टिमथी को फ़ायदा पहुँचाता रहा।

एक बार एक पड़ोसी ने मज़ाक़ में कहा कि टिमथी तुम बिल्लियाँ भी निर्यात करो, अन्य देश वालों को बिल्ली घरों में पालने की ज़रूरत रहती है। टिमथी ने सड़कों से पकड़ पकड़ कर बिल्लियाँ इकट्ठी करवायी और अपने निर्यात वाले जहाज़ों में इनकी भी खेप भेज दी। बिल्लियाँ वहाँ के खेत मालिकों ने ख़रीद ली क्यूँकि चूहे उनकी फ़सलों को ख़राब कर देते थे।

पड़ोसी दिन भर दिन उसकी सफलता से अब क्रोधित हो चुके थे। एक पड़ोसी ने अब एक बड़ी घातक सलाह दी जो कि प्रसिद्ध अंग्रेज़ी मुहावरे पर आधारित थी “ carry coals to new castle”. इसका अर्थ होता है कि किसी जगह वो चीज़ बेचना या ले जाना जहाँ वो चीज़ बहुतायत मात्रा में पहले से ही उपलब्ध हो। मतलब जहाँ वस्तु की अधिकता के कारण कोई डिमांड नहीं हो।

न्यूकैसल (NewCastle) इंग्लंड का कोयले की सबसे बड़ी खदानों वाला क्षेत्र है।

पड़ोसी ने कोयले को न्यूकैसल में निर्यात करने की अदूरदर्शी सलाह दे डाली। टिमथी अनपढ़ मूर्ख की तरह एक बार फिर इनकी बातों में आ गया।

क़िस्मत फिर एक बार टिमथी का इन्तज़ार कर रही थी, जब तक टिमथी की शिपमेंट न्यूकैसल पहुँची, वहाँ खदानों में हड़ताल शुरू हो गयी थी और टिमथी का सारा कोयला अत्यधिक ऊँची क़ीमतों पर बिक गया।

टिमथी के अन्य निर्यातों में भारत जैसे हिन्दू बहुल राष्ट्र में में बाइबल बेचना भी शामिल रहा, जिसे यहाँ के मिशनरीज़ ने हाथों हाथ लिया।

एक बार व्हेल की हड्डियाँ ख़रीदना जैसा फ़ैसला भी बाद मे उसको फ़ायदा दे कर गया।

टिमथी अपने सभी व्यावसायिक फ़ैसलों में क़िस्मत का धनी साबित हुआ। क़िस्मत टिमथी से मिलने को आतुर रहती थी।

स्वयं की मूर्ति का निर्माण

टिमथी अब तक शहर का सबसे बड़ा अमीर बन चुका था। टिमथी ने न्यूबैरीपोर्ट (Newburyport, City of USA) में एक मेन्शन जितना बड़ा घर ख़रीदा जो कि वर्तमान में न्यूबैरीपोर्ट सार्वजनिक पुस्तकालय है।

आत्म मुग्ध हो कर उसने घर की बाउंड्री वॉल पर उसने चालीस प्रसिद्ध व्यक्तियों की अलग अलग तरह की आदमकद मूर्तियाँ लगवायी। इन मूर्तियों में जॉर्ज वॉशिंटॉन, थामस जेफ़र्सोन, नेपोलियन बोनापार्ट व ख़ुद टिमथी की एक मूर्ति भी शामिल थी।

अपनी मूर्ति के नीचे टिमथी ने यह लिखाया “मैं पश्चिम में प्रथम हूँ, पूर्व में प्रथम हूँ और पश्चिमी दुनिया का महानतम दार्शनिक हूँ।

सिर्फ़ यही नहीं, समय समय पर अपनी मूर्ति पर नया पेंट करा कर एक नया स्व प्रशंसा वाला वाक्य लिखवाया करता था।

अंतिम संस्कार का आयोजन

टिमथी अपने अजीबोग़रीब पने की वजह से लोगों में हँसी का साधन बना रहता था। बीवी बच्चों से इसकी अनबन रहती थी।

टिमथी लोगों से कहता था कि जिस औरत को तुम मेरे घर पर देखते हो वो मेरी बीवी नहीं उसका भूत है।

अमीर होने के कारण उसके चापलूस भी बढ़ते जा रहे थे, टिमथी ने उन्हें कह रखा था कि वे सब उसे “लॉर्ड” कह कर सम्बोधित करें।

एक बार सिर्फ़ यह देखने के लिए की मेरी लोगों में कितनी पूछ है, टिमथी ने अपने क़रीबी लोगों को विश्वास में लेकर, अपने मरने की झूठी ख़बर फैला दी ताकि टिमथी यह देख सके की उसके अन्तिम संस्कार में कितने लोग आते हैं।

बीवी बच्चों को गमगीन रहने की सख़्त हिदायत दे दी गयी थी। कोतूहलवश क़रीब 3000 लोग उसके घर इक्कट्ठा हो गए।

टिमथी एक ओट में छुपकर लोगों की भाव भंगिमाएँ देखने लगा। उसने अपनी बीवी को देखा जो उस समय लोगों से मुस्करा कर बात कर रही थीं। यह देख टिमथी क्रोधित हो उठा और बीवी के रसोई की तरफ़ आने पर उसने छड़ी से बीवी कि पिटाई शुरू कर दी।

लोग जो टिमथी को मरा जानकर उसके घर आए थे, यह माजरा देखकर हैरान रह गए की टिमथी ज़िंदा है।

किताब की बारी

टिमथी डैक्स्टर ने आगे एक अजीब शीर्षक वाली किताब लिखी, जो एक तरीक़े से देखा जाए तो उसको अमर कर गयी।

A Pickle for the Knowing Ones, or Plain Truths in a Homespun Dress

(जानकारों के लिए अचार, या घरबुने कपड़ों में साधारण सच)

टिमथी ने इस किताब में ख़ुद को अमेरिका का लॉर्ड और महान विचारक घोषित करते हुए अपनी बीवी की बुराई, उच्च वर्ग के लोगों और राजनीतिज्ञों पर कटाक्ष किया था।

इस पूरी किताब के वाक्यों में कहीं भी टिमथी ने विराम चिन्हों का प्रयोग नहीं किया। ना तो कोई कोमा, ना फुल स्टॉप, कोई ब्रैकट, डैश कुछ भी नहीं। सतत वाक्य चलते गए जिस में कहीं भी उसने कैपिटल लैटर्स मनचाहे ढंग से काम में लिए।

चूँकि टिमथी एक अनपढ़ जैसा ही था तो उसकी इस किताब में स्पेलिंग मिस्टेक्स और व्याकरण अशुद्धियों की भरमार थी।

टिमथी ने इस किताब को लोगों में मुफ़्त में वितरित करवाया ताकि लोग उसकी महानता से परिचित हो सकें।

क़िस्मत ने यहाँ भी उसका भरपूर साथ निभाया, किताब के विचित्रपन की वजह से उसकी और प्रतियों की माँग आ गयी।

लोगों ने जब टिमथी को उसकी व्याकरण सम्बंधी अशुद्धियों की तरफ़ ध्यान दिलाया तो टिमथी ने द्वितीय संस्करण में अन्त में विराम चिन्हों का एक पूरा पृष्ठ दे दिया और अपनी स्पेलिंग मिस्टेक्स से भरे वाक्य में कहा कि जो इन्हें जहाँ चाहे लगा ले।(thay may peper and solt it as they plese)

इस किताब के कुल आठ संस्करण छपे जो इसकी सफलता की कहानी कहते हैं।

आज भी यह किताब बिक्री के लिए ऑनलाइन साइट्स पर उपलब्ध है।

आख़िरी बात

टिमथी डैक्स्टर इसके कुछ समय ही पश्चात 1806 में सद्गति को को प्राप्त हुआ।

निस्सन्देह टिमथी एक अनपढ़ मूर्ख था पर जो सफलता का स्वाद उसने चखा वो अच्छे अच्छे समझदारों और पढ़े लिखे लोगों को नसीब नहीं होता।

वो एक ख़ास पर रोचक बेवक़ूफ़ था या शायद हम सब लोगों की समझ से ज़्यादा समझदार भी।

इति।

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