रेंट एग्रीमेंट 11 महीने के लिए क्यों होता है, 6 या 12 महीने का क्यों नहीं होता

भारत देश में 27 राज्य हैं और सभी राज्यों में सरकारों ने किरायेदारों के लिए अलग-अलग नियम बनाए हैं परंतु एक मामला ऐसा है जिसमें भारत के सभी मकान मालिक और किराएदारों के बीच एक जैसा व्यवहार होता है, और वह है रेंट एग्रीमेंट। आप देश के किसी भी कोने में चले जाइए। मकान मालिक को कितना भी स्पष्ट बता दीजिए कि आप उसका मकान कितनी समय अवधि के लिए किराए पर लेने वाले हैं परंतु वह हमेशा 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनवाता है। प्रश्न यह है कि रेंट एग्रीमेंट 11 महीने के लिए ही क्यों बनाया जाता है। कौन सा कानून है जो रेंट एग्रीमेंट को 11 महीने से कम या ज्यादा करने से रोकता है। आइए जानते हैं: 

रेंट एग्रीमेंट क्या होता है क्यों बनाया जाता है

रेंट एग्रीमेंट को लीज एग्रीमेंट भी कहते है। यह मकानमालिक और किराएदार के बीच में लिखित अनुबंध होता है। इस अनुबंध पत्र में में दोनों पक्षों की शर्तें लिखी होती है। इसके अलावा संपत्ति की पूरी जानकारी भी होती है। जैसे कि मकान का एड्रेस, मकान का साइज, मासिक किराया, सिक्यूरिटी डिपॉजिट और जिस काम के लिए प्रॉपर्टी को किराए पर दिया जा रहा है। इस प्रकार दोनों पक्षों को एक दूसरे के बारे में दस्तावेजी साक्ष्य प्राप्त हो जाता है। ऐसी स्थिति में यदि कोई एक पक्ष अनुबंध की शर्तों को तोड़ता है तो एग्रीमेंट के जरिए न्यायालय दूसरे पक्ष की रक्षा करती है।

रेंट एग्रीमेंट 11 महीने से ज्यादा का क्यों नहीं होता 

कानून की किसी भी किताब में प्रॉपर्टी लीज एग्रीमेंट या जिसे सामान्य बोलचाल की भाषा में रेंट एग्रीमेंट कहते हैं, की अवधि के बारे में कुछ भी नहीं लिखा। रेंट एग्रीमेंट 1 महीने के लिए भी हो सकता है और 11 साल के लिए भी परंतु ज्यादातर लोग इसे 11 महीने के लिए बनाते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि यदि प्रॉपर्टी लीज एग्रीमेंट को 11 महीने से ज्यादा अवधि के लिए तैयार किया जाएगा तो फिर इसे रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर्ड भी कराना होगा। सभी राज्यों में इसके लिए काफी टैक्स लिया जाता है। बस इसी टेक्स को बचाने के लिए रेंट एग्रीमेंट अधिकतम 11 महीने के लिए बनाया जाता है। 

रेंट एग्रीमेंट 11 महीने से कम अवधि के लिए क्यों नहीं बनाते

सवाल यह है कि 11 महीने से कम अवधि के लिए क्यों नहीं बनाया जाता। इसका सरल जवाब यह है कि रेंट एग्रीमेंट टाइप करने वाले ऑपरेटर अपने पास एक फिक्स फॉर्मेट रखते हैं। दोनों पक्षों के नाम एवं संपत्ति की जानकारी इत्यादि भरने के बाद प्रिंट निकाल देते हैं। यदि आप एग्रीमेंट की शर्तों या समय अवधि में संशोधन करने की बात करेंगे तो वह आपसे ज्यादा फीस चार्ज करेगा। इसीलिए एग्रीमेंट 11 महीने के लिए बनाया जाता है